Objects to Collect
We need objects to collect
stamps, coins, pebbles
from the beach
not for the waves
or dates they've weathered
but for the smug peace
we find in our taste
My cupboard would once boast
a Mondavi, a Chateauneuf,
the odd Cote du Rhone,
and some tongue twister
(with rather subtle tannins)
from the Spanish coast
I can now tell the different kinds
of figs, palms, ferns and pines,
judge for crispness and form,
feel the stem for tenderness.
We need objects to collect-
things to read between the lines
Teleology
I must speak Aristotle, for I am a Philosopher.
I must speak, Aristotle, for I am a Philosopher.
I must speak. For Aristotle, I am a Philosopher.
I must speak for Aristotle. I am a Philosopher.
मेरी किताबें
मेरी किताबों को लंदन जाने में
कोई दिलचस्पी नहीं है
जबसे मिली है खबर
मुझसे खफ़ा रहती हैं
ग़ालिब के दीवान को तो
ख़ास सदमा पहुंचा है
उसमें पड़े मेरे आंसूं
कबसे बह रहे हैं
नेरुदा ने कुछ दिलासा दी है उसको
जिला वतनी का तजुर्बा जो है उसको
इल्म का गुरूर है शायद
खूब डरा-धमका चुका हूँ
कि वापस दर्यागंज ले जाऊंगा
वही पुराने फुटपाथ पर,
और वो हैं कि
जवाब देती हैं, बेशर्मी से
पलट कर मुझको
'क़ुबूल है'
भूत बंगला
जिस भूत बंगले में
sixer मारने के लिए
आउट होने की सज़ा रखी थी
उस बंगले में कोई रहने आया है
सोचता हूँ
क्या वो उनको भी निगल जायेगा?
या फिर माली के बेटे की तरह,
जिसके हाथ में
रोज़ नयी बॉल होती,
इनकी भी भूत के साथ
कुछ setting है?
Rational
दादाजी मिलिट्री में, इसलिए rational हैं,
वो ऐसा कहती हैं,
जब मैं दादी के पिताजी की पुरानी डायरी
जिसमें वो लाहौर के अपने मोहल्ले में सुने
शेर लिखा करते थे,
उस पर धोबी के हिसाब देख कर
हैरान होता हूं
अब मैं भी rational सा हो गया हूँ;
मैंने एक birthday कार्ड पर
आज एक फ़ोन नंबर नोट किया।
वो कार्ड तुम्हारा था, खुद का बनाया गया
तुमने कई सालों से मुझे कार्ड नहीं भेजा,
और शायद ना अब कभी भेजोगे.
पर अब कोई बात नहीं, मैं भी
rational हो गया हूं
Loudspeaker
जब मेरे घर के सामने खंबे पर एक
loudspeaker लगा दिया,
मुझे दादाजी याद आ गए
जिन्हे ज़रूरत है,
पर क्योंकि respect का मामला है,
इसलिए hearing aid नहीं लगाएंगे।
शायद मेरी पड़ोसन के भगवान
की भी कुछ ऐसी ही ज़िद्द हो.
फूल चुनने की रसम
ख़िज़ां ने फ़लक की चिता को यूं आग दी,
चुनने को फूल एक बचा नहीं।
For Rhodes Must Fall
सेसिल रोड्ज़ को गिरना होगा। आजकल सबकी ऐसी कुछ ज़िद्द है। मेरे लिहाज़ से रोड्ज़ खुद भी यही सोचते होंगे। सड़क के बीच भी कोई तख़्त लगाता है? बर्तानिया की सख्त हवाएं, बारिशों के चाबुक, ट्रैफिक और इंक़लाब का हल्ला। इससे ज़्यादा ज़लील बादशाह देखा है कोई? कब तक परिंदों के रहम पर जीयेगा? सेसिल रोड्ज़ को गिरना होगा।
Casio
Casio पर उंगली पकड़ कर
ले जाता हूँ, दूर,
किसी पुरानी धुन तक,
जैसे कभी main road से लड़ कर, दादी मेरी
पार्क ले जाया करती थी
तब उन्हें अँधेरे का डर
रहता था, और अब
सिर्फ मुझे.
Ruskin’s Typewriter
क्यों बयां किया दर्द
अपनी गलती पर? क्यों आसान किया
जीना, लिख कर?
ये कायदे नहीं
प्रायश्चित के, रस्किन।
Sisyphus की तरह, वो typewriter*
तुझे फिर उठाना होगा
लंदन से मसूरी तक
फिर, वही किस्सा सुनाना होगा।
*For some time, I did not send any money to Mr. Bromley. My wage was modest, and London was expensive, and I wanted to enjoy myself a little. I meant to write to him, explaining the situation, but kept putting it off, telling myself that I would write as soon as I had some money to send him.
Several months passed. I wrote the book a third time, and this time, it was accepted and I received a modest advance. I opened an account with Lloyds, and then, finally, I made out a cheque in the name of Mr. Bromley and mailed it to him with a letter.
But it was never to be cashed. It came back in the post with my letter, and along with it, was a letter from my former employee saying that Mr. Bromley had gone away and left no address. It seemed to me that he had given up his quest for better health, and had gone home to his own part of the country.
And so my debt was never paid.
The typewriter is still with me. I have used it for over thirty years, and it is now old and battered. But I will not give it away. It’s like a guilty conscience, always beside me, always reminding me to pay my debts in time.
-The Typewriter, Ruskin Bond (The Lamp is Lit)
सुबह की ट्रेन
ट्रेनें दौड़ती हैं बेपरवाह
सुबह की जल्दबाज़ी में
किसी से उनका क्या लेना-देना?
कुछ स्टेशन का सफर कर लूं
थोड़ा और तुम्हारे साथ, मैं भी
एक ट्रेन की तरह आज दौड़ा-दौड़ा आया था
मगर नहीं रुकी मेरे लिए,
ना कोई वजह ना दलीलें सुनने
उस ट्रेन का ऐसी ख्वाहिशों से
क्या लेना-देना?
अब कश्मीरी गेट के प्लेटफार्म पर ही
मिलूंगा तुमसे.
इंतज़ार करोगे मेरा या फिर
सुबह की जल्दबाज़ी में,
चल निकोलगे तुम भी
बेपरवाह?
To a Queer Lover
एक दिन हम भी Marine Drive पर बैठेंगे
लहरों-सी उछल-कूद करती इमारतों
आशिकों-सी हलचल वाले ट्रैफिक के दरमियान
हम भी उस मंज़र में मामूल होंगे
एक दिन हम भी Marine Drive पर बैठेंगे
बुंदेले हरबोलों की कहानी
बुंदेले हरबोलों के मुँह खींच के चांटा धर दिया
थी बहादुर रानी तो उसको मर्दाना कर दिया
मासी राजपुरा वाली
बड़ी ज़िंदादिल औरत थी राज मासी। दही भल्ले में उनका मुकाबला राजपुरा का सबसे आला हलवाई भी ना कर पाता। और फिर सिर्फ हुनर ही नहीं, शौक भी लाजवाब था उनका। मासी बोलती सिर्फ पंजाबी थी और बात सिर्फ खाने की करती थी। एक शाम मैं टेनिस की क्लास से थका लंगड़ाता हुआ घर आया तो पूछी “सट्ट लगी है तेन्नु*?” “नहीं मासीजी भूख नहीं है अभी”। लेकिन कुछ ही देर में उन्होने मेरी मेज़ पर शिंकजी और नामकपारों का घेरा डाल दिया।
मासीजी मेरी नानी की चचेरी बेहेन थी। मौसा जी के गुज़र जाने के बाद ज़िंदगी बहुत तंग रही थी उनकी। प्रॉपर्टी को लेकर लड़कों से कई बरसों से झगड़ा चल रहा था। और झगड़ा इतना की बात कचेहरी तक पहुंच चुकी थी। याद है मुझे आज भी कैसे बाघबान देखकर इतना रोई थी की उस रात खाने तक को नहीं पूछा हमसे।
उनकी दिन में तीन चाय लाज़मी थी। घर में दूध डेढ़ से दो लीटर मँगाना पड़ा था उन दिनों। मुझे भी चाय का चस्का मासी के रेहते में ही लगा था। और साथ इतने रोज़ रही कि उतरा भी उनके रेहते में ही। दिल्ली के बाद मासीजी पटियाला चली गयी। वहां मौसा जी के रिश्तेदारी में कोई था उनका हमदर्द। बहुत केहने पर भी मोबाइल नहीं खरीदा था उन्होने। मैं जब पढ़ रहा होता तभी छोटी लाल डाइयरी लिये मुझसे किसी ना किसी का नंबर लगाने को कहती। नंबर ना लगे तो दूसरा कोई मिलाना पड़ता। और अगर लग जाये तो पढ़ाई का प्रोग्राम उनकी ऊँची आवाज़ से रद्द हो जाता।
मासीजी से अब मेरी बरसों बात नहीं हुई है। मैने माँ से जब पूछा तो वो बोली “कोठी मिल गयी है अपनी वापस कोर्ट से। इसलिये पूछती तक नहीं है अब हमको”. कभी दही भल्ले दिख जायें तो मासी की बड़ी याद आती है। “सट्ट लगी है तेन्नु?” पूछती है मुझसे। “हाँ मासीजी। बड़ी ज़बरदस्त!”
*सट्ट लगी है तेन्नु-> चोट लगी है तुझे?
Sh
Tumhare naam mein
shalgam wala sh
aata hai
ki shatkon wala?
Shatkon wala
sh kya hota hai?
Jismein pa ke
galey mein
lakeer lagti hai.
Lekin ye shatkon
kya hota hai?
Cheh koney ka aakaar:
jaise peych ki shaqal.
Phir shalgam mein kaunsa
sh aata hai?
Sshh! English mein
hi likh deta hoon.
Shatkon wala sshh
ki shalgam wala?